सावधान ! केमिकल से पके केले; पपीते तो नहीं खा रहे।
सावधान ! केमिकल से पके केले, पपीते तो नहीं खा रहे। ऐसे पकाए जाते हैं कच्चे केले-पपीते केला और पपीता ऐसे फल हैं जिन्हें बहुत-से लोग रोजाना खा रहे हैं। केला हमें तुरंत एनर्जी देता है पपीता खाने से पेट ठीक रहता है और कई पोषक तत्व मिलते हैं। पहले ये फल पेड़ पर ही पक जाते थे या इन्हें घरेलू तौर पर पकाया जाता था। लेकिन अब इन्हें पकाने के लिए बड़े पैमाने पर केमिकल का इस्तेमाल हो रहा है। क्या है इसका प्रोसेस, यही जानने के लिए हम पहुंचे राजधानी की आजादपुर मंडी में। यह एशिया की बड़ी फल-सब्जी की मंडियों में से एक है। यहां देश के विभिन्न हिस्सों से हर रोज 15 से 16 पपीते के ट्रक पहुंचते हैं। हर ट्रक में करीब 15 टन पपीते होते है। दिसंबर और जनवरी में इनकी मांग बढ़ जाती है। मंडी के फूट सेलर कहते है कि दिसंबर और जनवरी के महीनों में इन ट्रकों की संख्या बढ़कर रोजाना 30 से 35 तक पहुंच जाती है। हालाकि केले सीधे मंडी में नहीं पहुंचते। इन्हें दिल्ली से सटे टीकरी बॉर्डर पर लाया जाता है। यहां कोल्ड स्टोरेज बने हुए है, जिनमें केलों को रखा जाता है। यहां से बाकी जगह सप्लाई होती है। इन बॉर्डर इलाक...