धरती का पानी अंतरिक्ष से आया था!
धरती का पानी अंतरिक्ष से आया था!
जब हम गिलास में पानी भरते हैं तो शायद यह नहीं सोचते कि यह पानी कभी अंतरिक्ष में था। लेकिन विज्ञान कहता है हमारी धरती पर मौजूद पानी,जो जीवन की जड़ है,धरती की उत्पत्ति के साथ नहीं बना था बल्कि यह अरबों साल पहले अंतरिक्ष से आया था।
पृथ्वी की शुरुआत एक आग का गोला
लगभग 4.5 अरब वर्ष पहले जब सौरमंडल बना तो पृथ्वी एक दहकता हुआ पत्थरीला गोला थी। तापमान इतना अधिक था कि कोई भी तरल पदार्थ खासकर पानी टिक नहीं सकता था यानि उस समय की पृथ्वी पूरी तरह सूखी और निर्जीव थी।
बर्फीले उल्कापिंडों और धूमकेतुओं का आगमन
सौरमंडल के बाहरी हिस्सों में कई बर्फ से ढके उल्कापिंड और धूमकेतु मौजूद थे। इनमें पानी,मीथेन और अन्य गैसें जमी हुई थीं। जब यह खगोलीय पिंड गुरुत्वाकर्षण के कारण पृथ्वी से टकराए तो उनकी बर्फ पिघलकर पानी में बदल गई और धीरे-धीरे धरती पर महासागर बनने लगे।
धीरे-धीरे बनी नीली धरती
लाखों-करोड़ों वर्षों तक लगातार ऐसे टकराव होते रहे। हर टकराव के साथ पृथ्वी पर थोड़ा-थोड़ा पानी जमा होता गया। धीरे-धीरे यह पानी गहराई तक रिसकर महासागरों,नदियों और झीलों का रूप लेने लगा और यही वह पल था जब धरती नीली दिखने लगी The Blue Planet।
वैज्ञानिक प्रमाण: पानी का अंतरिक्षीय रिश्ता
NASA और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसियों (ESA) ने कई धूमकेतुओं और उल्कापिंडों की रासायनिक संरचना का अध्ययन किया है। जैसे Comet 67P/Churyumov Gerasimenko और carbonaceous chondrite meteorites। इनमें मौजूद ड्यूटेरियम-हाइड्रोजन अनुपात (D/H ratio) पृथ्वी के समुद्री पानी जैसा पाया गया। इससे साबित हुआ कि धरती का पानी बाहरी खगोलीय पिंडों से आया था।
अंतरिक्ष से आया जीवन का बीज
पानी सिर्फ धरती पर नहीं गिरा उसके साथ आए कार्बनिक अणु जीवन के शुरुआती रूपों के लिए बीज बने। यही से पृथ्वी पर रासायनिक प्रतिक्रियाएँ शुरू हुईं और अंततः जीवन का जन्म हुआ यानि हम सबमें अंतरिक्ष का अंश है!
निष्कर्ष
धरती का पानी किसी जादू से नहीं बना,यह एक कॉस्मिक गिफ्ट था। हर बूंद जो हमारे शरीर में बहती है,कभी किसी धूमकेतु की पूंछ में थी,कभी किसी दूर तारे की परिक्रमा कर रही थी। इसलिए अगली बार जब आप पानी पीएं तो सोचिए आप सिर्फ पानी नहीं पी रहे बल्कि अंतरिक्ष का एक अंश पी रहे हैं।
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