चरणामृतका क्या महत्व है,

अक्सर जब हम मंदिर जाते है तो पंडित जी हमें भगवान का चरणामृत देते है,
क्या कभी हमने ये जानने की कोशिश की कि चरणामृतका क्या महत्व है,

► शास्त्रों में कहा गया है

_अकालमृत्युहरणं सर्वव्याधिविनाशनम्।_
_विष्णो: पादोदकं पीत्वा पुनर्जन्म न विद्यते॥_

_अर्थात्:--_ भगवान विष्णु के चरण का अमृत रूपी जल समस्त पाप -व्याधियों का शमन करने वाला है तथा औषधी के समान है।
जो चरणामृत पीता है उसका पुनः जन्म नहीं होता" जल तब तक जल ही रहता है जब तक भगवान के चरणों से नहीं लगता, जैसे ही भगवान के चरणों से लगा तो अमृत रूप हो गया और चरणामृत बन जाता है।
धर्म में इसे बहुत ही पवित्र माना जाता है तथा मस्तक से लगाने के बाद इसका सेवन किया जाता है।
चरणामृत का सेवन अमृत के समान माना गया है।    

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