02.00 प्राचीन भारत के इतिहास को जानने के साधन (साहित्यिक साधन)

02.00 प्राचीन भारत के इतिहास को जानने के साधन (साहित्यिक साधन)

भारत मे लिषि उत्पति ई. पू. 2500 मे हो गई थी। मगर हस्तलिपि के प्रमाण चतुर्थ शताब्दी ई. पू. से ही मिलते हैं।
Ⅱ साहित्यिक साधन Ⅱ
A. धार्मिक साहित्य
B. ऐतिहासिक साहित्य
C. अनुवादित साहित्य

A. धार्मिक साहित्य
1. वेद 
वेद –> वेद 4 हैं । (i). ऋग्वेद (सबसे प्राचीन), (ii). यजुर्वेद, (iii). सामवेद, (iv). अथर्ववेद आदि
★ भारत के सबसे प्राचीन ग्रन्थ 'वेद' का शाब्दिक अर्थ "ज्ञान" है । 
★ श्रवण परम्परा में सुरक्षित होने के कारण "श्रुति' कहा गया है।
★ वेदव्यास ने वेदो का संकलन किया था।

2. उपवेद 
प्रत्येक वेद का एक उपवेद है इस प्रकार 4 उपवेद हुए।
(क) आयुर्वेद –> यह ऋग्वेद का उपवेद है तथा औषधि विज्ञान का वर्णन है।
(ख) धनुर्वेद –> यह यजुर्वेद का उपवेद है इसमें युद्ध कला का वर्णन है।
(ग) गान्धर्ववेद –> यह सामवेद का उपवेद है इसमें नृत्य और संगीत की जानकारी है।
(घ) शिल्पवेद –> यह अर्थवेद का उपवेद है। इसमें भवन निर्माण कला का वर्णन है।

2. उपनिषद (800 से 500 ई.पू.)
उपनिषद –> 108 प्रमाणिक है। वेदों के बाद आने के कारण इन्हे वेदान्त भी कहते है। (अर्थ –>  उप = समीप + नि =निष्ठा पूर्वक + सद = बैठना) । 
इनका मुख्य विषय ब्रह्मविद्या 

जैसे मुक्तिकोपनिषद में 108 उपनिषदों का वर्णन है । मगर सर्वाधिक प्राचीन उपनिषदों में केवल 12 उपनिषद हैं। ये 12 उपनिषद ईश, केन, कठ, प्रश्न, मुण्डक, माण्डुक्य, तैतरीय, ऐतेराय, छान्दोग्य, वृहदारण्यक, श्वेताश्वर तथा कोषितकी हैं।

शंकराचार्य आरम्भिक दस उपनिषदों पर महाभाष्य लिख चुके है। 
"सत्यमेव जयते" राष्ट्रीय वाक्य मुण्डोकोपनिषद से लिया गया है

अरण्यकग्रन्थों से उपनिषदो का विकास हुआ है। अरण्यक अर्थात वन में पढ़ाये जाने के निमित्त या रचना अरण्योनी मानी गई हो

ऋग्वेद का परिचय
1.1 नाम की व्युत्पत्ति
  • "ऋच्" + "वेद" = ऋग्वेद
  • "ऋच्" का अर्थ है स्तुति, मंत्र या प्रशंसा के काव्य।
  • "वेद" का अर्थ है ज्ञान।
  • अतः ऋग्वेद का अर्थ हुआ: "स्तुति के ज्ञान का ग्रंथ" या "प्रशंसात्मक मंत्रों का ज्ञान"।

1.2 रचना काल

  • विद्वानों के अनुसार ऋग्वेद की रचना 1500–1200 ई.पू. के बीच मानी जाती है।
  • परंतु भारतीय परंपरा इसे अनादि (शाश्वत) मानती है — अर्थात, यह सृष्टि के साथ ही अस्तित्व में आया।

1.3 रचयिता

ऋग्वेद किसी एक व्यक्ति द्वारा रचित नहीं है, यह सप्तर्षियों एवं उनके वंशजों की वाणी का संग्रह है। प्रमुख ऋषियों में शामिल हैं:

  • वशिष्ठविश्वामित्रगृत्समदकण्वभारद्वाजअत्रिवामदेवकश्यप आदि।

2. ऋग्वेद की संरचना

2.1 कुल संहिता

  • मंडलों की संख्या: 10
  • सूक्तों की संख्या: 1,028
  • मंत्रों या ऋचाएं की संख्या: लगभग 10,552
  • वर्णन की विधि: पद्य रूप में, अनुष्टुप, गायत्री, त्रिष्टुप, जगती आदि छंदों में।

मंडलों का विभाजन

मंडलप्रमुख ऋषिदेवताविशेषता
1विविधविविधसंग्रहित
2गृत्समदइन्द्र, अग्निसबसे छोटा मंडल
3विश्वामित्रइन्द्र, अग्निगायत्री मंत्र
4वामदेवइन्द्र, अग्निगूढ़ अध्यात्म
5अत्रिमित्र, वरुणयज्ञ पर बल
6भारद्वाजइन्द्र, अग्नियुद्ध व वीरता
7वशिष्ठइन्द्र, वरुण, विष्णुसुदास-10 राजाओं का युद्ध
8कण्वइन्द्र, उषामिश्रित विषय
9सोम पावमानासोमसोम के शुद्धिकरण
10विविधनासत्य, सरस्वतीनासदीय सूक्त, पुरुष सूक्त

ऋग्वेद की संक्षेप में विशेषताएं 
★ सबसे प्राचीन वेद => ऋग्वेद
★ वेदों की संख्या => 4 (ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद)
★ मंडलों की संख्या => 10
★ ऋग्वेद में सूक्तों की संख्या => 1,028
★ ऋग्वेद में मंत्रों या ऋचाओं की संख्या => 10,552
★ सबसे पुराना मंडल => द्वितीय मंडल
★ सबसे नवीन मंडल => प्रथम और दशम मंडल
★ सबसे बड़ा मंडल => प्रथम मंडल
★ सबसे छोटा मंडल => दूसरा मंडल
★ ऋग्वेद का प्रमुख देवता => इन्द्र
★ अग्नि पर सबसे पहला सूक्त => प्रथम मंडल, प्रथम सूक्त
★ केवल सोम देवता को समर्पित मंडल => नवम मंडल
★ स्त्रियों द्वारा रचित सूक्तों की संख्या => लगभग 12
★ स्त्री ऋषियाँ => घोषा, लोपामुद्रा, अपाला, शची, कक्षा-वृत्ति 
★ नासदीय सूक्त => 10.129 (सृष्टि का रहस्य)
★ पुरुष सूक्त => 10.90 (वर्ण व्यवस्था का विवरण)
★ ऋग्वेद का प्रमुख छंद => गायत्री, त्रिष्टुप, जगती
★ भाष्यकार => सायणाचार्य (14वीं शताब्दी)
★ ऋग्वेद किस लिपि में था? => ब्राह्मी लिपि में नहीं, श्रुति परंपरा में मौखिक रूप से सुरक्षित
★ ऋग्वेद किस भाषा में है? => वैदिक संस्कृत
★ शूक्त का हिंदी अर्थ क्या है? => अच्छी उक्ति 
★ लोपामुद्रा => लोपामुद्रा, विदर्भ राज की पुत्री और अगस्त्य ऋषि की पत्नी थी।

1. ऋग्वेद 1500 से 1000 ई.पू. 
ऋग्वेद –> 1500 से 1000 ई.पू. तथा भरता की सर्वाधिक प्राचीन रचना है। 
★ इसकी 5 शाखाएं हैं। => सांकल, वाष्कल, अस्वलयन, शांखायन तथा मंडाक्य
★ सम्पूर्ण ऋग्वेद सहिता में 10 मंडल तथा 1017 सूक्त है।
★ ऋक - छन्दो तथा चरणों से युक्त मंत्र
★ ऋग्वेद - मंत्रो की संहिता अर्थात संकलन है।
★ देवस्तुति के होतृ ऋषियों द्वारा उच्चरित‌ किया जाता था। ★ ऋग्वेद की अनेक संहिताओं में से उपलब्ध सहिता 'शांकल संहिता' है । (संहित = संग्रह / संकलन)
★ सम्पूर्ण सहिता में 10 मंडल 1024 शूक्त, कुलमंत्र संख्या या ऋचाएं 10600 है। 
★ दो से नवां मंडल प्रमाणिक व शेष को प्रक्षिप्त माना गया है। (अर्थात बाद‌ में जोडे है।)
★ दशवे मंडल में सर्वप्रथम शूद्रों का उल्लेख हुआ है। दशवे मंडल को पुरुषशूक्त के नाम से जाना जाता है । इसी मंडल में गयत्री/ सावित्री मंत्र का उलेकख है।
★ नवे मंडल में सोमदेव का उल्लेख है।
★ परिवार –> गांव –> जन तथा जन का मुखिया राजा होता था। 
★ ऋग्वेद से आर्यों व अनार्यों के युद्ध का ज्ञान होता है।
★ ऋग्वेद की प्रत्येक ऋचा के साथ उनके ऋषि तथा देवता का नाम भी दिया गया है।
★ आठवे मंडल के ऋषि कण्व तथा अंगिरश वंश के थे।
★ प्रथम, नवें और दसवें मंडल के मूल दृष्टा अनेक ऋषि थे।

प्रमुख तथ्य (Objective/MCQ Preparation)

विषयविवरण
सबसे प्राचीन वेदऋग्वेद
वेदों की संख्या4 (ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद)
ऋग्वेद में सूक्तों की संख्या1,028
ऋग्वेद में मंत्रों की संख्यालगभग 10,552
मंडलों की संख्या10
सबसे पुराना मंडलद्वितीय मंडल
सबसे नवीन मंडलप्रथम और दशम मंडल
सबसे बड़ा मंडलप्रथम मंडल
सबसे छोटा मंडलदूसरा मंडल
ऋग्वेद का प्रमुख देवताइन्द्र
अग्नि पर सबसे पहला सूक्तप्रथम मंडल, प्रथम सूक्त
केवल सोम देवता को समर्पित मंडलनवम मंडल
स्त्रियों द्वारा रचित सूक्तों की संख्यालगभग 12
स्त्री ऋषियाँघोषा, लोपामुद्रा, अपाला, शची, कक्षा वृत्ति 
नासदीय सूक्त10.129 (सृष्टि का रहस्य)
पुरुष सूक्त10.90 (वर्ण व्यवस्था का विवरण)
ऋग्वेद का प्रमुख छंदगायत्री, त्रिष्टुप, जगती
भाष्यकारसायणाचार्य (14वीं शताब्दी)
ऋग्वेद किस लिपि में था?ब्राह्मी लिपि में नहीं, श्रुति परंपरा में मौखिक रूप से सुरक्षित
ऋग्वेद किस भाषा में है?वैदिक संस्कृत

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2. सामवेद 
सामवेद 1000-500 ई.पू. का है।

साम= संगीत / गान (यज्ञो के समय गाये जाने वाले या
गैय मंत्रो का संग्रह है।)

गाने वाला ऋषि उद्‌गाता कहलाता था

सामवेद में कुल मंत्रों की संख्या 1549 है।

सामवेदके दो भाग (1) पूर्वाचिक या आर्चिक (2) उत्तरार्चिक या ज्ञान है।
सामवेद के प्रथमदृष्टया वेद व्यास शिष्य जैमिनी माने जाते हो

शाखाए कोणुभीष, जैमनीप, सणापनीय 1547चाएं है जिनमें 28 हीनयी है। शेषश्रमवेद सेली हो

वाह भारतीय संगीत का जनक माना जाता है। यह भारतीय संगीत का प्रथम गये मायाजाला


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